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रविवार, 1 जून 2014

चुनमुन गिलहरी


एक गिलहरी प्यारी-प्यारी
नाम है उसका चुनमुन
सुबह सुबह उठ  जाती  है वो
फुदकती    फिरती वन वन 
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एक रोज वो फुदक रही थी
देखा उसने बाज
थर थर कांपी  जोर से  
हालत हुई ख़राब
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फिर भी उसने जोर से
सबको दी आवाज  
यहाँ नहीं आना कोई
पेड़ पे बैठा बाज
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तभी एक बन्दर आया
जोर से पेड़ हिलाया
पेड़ के हिलते ही
बाज बहुत घबराया
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बाज वहां से भाग लिया
तो बन्दर भी मुस्काया
चुनमुन ने ली साँस चैन की
बड़ा मजा था आया.
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शिखा कौशिक 'नूतन '

6 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (02-06-2014) को ""स्नेह के ये सारे शब्द" (चर्चा मंच 1631) पर भी होगी!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Digamber Naswa ने कहा…

प्यारी सी बाल रचना ...

Yashwant Yash ने कहा…

कल 03/जून /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

Neeraj Kumar Neer ने कहा…

सुन्दर बाल कविता

Neeraj Kumar Neer ने कहा…

सुन्दर बाल कविता

Chaitanyaa Sharma ने कहा…

बहुत प्यारी कविता