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गुरुवार, 19 मई 2011

एक चिड़िया

एक चिड़िया 

फुदक-फुदक कर डोल रही है 
मेरी बगिया में एक चिड़िया .

कितना मीठा बोल रही है ;
मेरी बगिया में एक चिड़िया .

फव्वारे में नहा रही है ;
मेरी बगिया में एक चिड़िया .

सबका मन बहला रही है ,
मेरी बगिया में एक चिड़िया .

                           शिखा कौशिक 

4 टिप्‍पणियां:

mahendra srivastava ने कहा…

बहुत बढिया है ये आपकी बाल कविता, बच्चों को तो जल्दी से याद भी हो जाएगा।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर बालरचना!

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर है चिड़िया की कविता....

Surendrashukla" Bhramar" ने कहा…

मन करता है हम भी कूदें फव्वारे में चिड़ियों की संग खूब नहायें -सुन्दर रचना बधाई हो


फव्वारे में नहा रही है ;
मेरी बगिया में एक चिड़िया .