


तोता चाचा चले बाज़ार
साइकिल पर होकर सवार ,
साइकिल को नहीं किया चैक
साइकिल के थे फेल ब्रेक ,
तेज चलाकर जाते थे
हवा से वे बतियाते थे ,
तभी सामने दिखी थी बस
ब्रेक दिए थे हाथ से कस ,
हुई न जब धीमी रफ़्तार
छोड़ साइकिल भरी उड़ान ,
बस-साइकिल की हुई भिड़न्त
पिचकी साइकिल तोता जी दंग ,
याद ये रखना बात खास
पंख न होते हमारे पास ,
साइकिल पर जब हो सवार
ब्रेक चैक कर लो कई बार .
शिखा कौशिक 'नूतन''
2 टिप्पणियां:
सुंदर कविता,..... बढ़िया बात समझाती
सुन्दर ब्लॉग.... मजा आ गया ... एक नन्ही चिड़ियाँ के लिए हमने कुछ शब्द चुरा लिए हैं ... आपको बुरा तो नहीं लगेगा न ?
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