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शुक्रवार, 29 जून 2012

दादा जी हम नाना के घर घूम के आये हैं!


दादा  जी हम नाना के घर  घूम  के आये  हैं!




दादा  जी हम नाना के घर  घूम  के आये  हैं  ;
मामा   ने हमें चाट-पकौड़ी खूब  खिलाएं  हैं .

दादा जी वहां नाना जी लगते हैं आपके जैसे   ;
बिन  मांगें पकड़ा  देते   हैं  कुल्फी के  लिए  पैसे   ,
शैतानी करने  पर  हमको   डांट  पिलायें  हैं .
दादा जी हम नाना के .......

नानी  माँ में  दादी  माँ जैसा है रूप  समाया  ;
नई कहानी रोज़ सुनकर नैतिक  पाठ  पढाया  ,
आशीषें   देकर  हर  लेती  सभी बलाएं हैं .
दादा जी हम नाना के घर .........

मौसी कहती  बिलकुल  मम्मी जैसे लगते हो तुम ;
मामा कहते  हँसो  जरा  क्यों  बैठे  रहते  गुमसुम  ,
चूम के माथा  ,गोद उठाकर  हमें घुमाएँ हैं .
दादा जी हम नाना के घर घूम के आयें  हैं .
                                                               शिखा कौशिक  
                                       [मेरा  आपका  प्यारा   ब्लॉग   ]

3 टिप्‍पणियां:

"रुनझुन" ने कहा…

very sweet and heart touching !!!

चैतन्य शर्मा ने कहा…

प्यारी सी कविता

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

छुट्टियों में ये घर घर की कहानी है
बहुत बढिया