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रविवार, 20 फ़रवरी 2011

अनोखी जिद

न बाहर घूमने जाना है ;
न वीडियो गेम चलाना   है ;
हमने मन में ठाना है ;
इस जिद को मनवाना है ;
हमको भी अपनी छत पर
झंडा अब फहराना है !
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तीन रंग का मोहक झंडा
जिसके बीच में चक्र बना ;
श्वेत  -हरा और केसरिया का
संयोजन है बड़ा भला ,
इसको सतत सलामी देकर
अपना फर्ज निभाना है ,
सबको अब अधिकार मिला है
छत पर झंडा फहराना है .
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                                                        शिखा कौशिक


3 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

achhi jid, jai hind ......

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता है...... शिखा दी

उदगार ने कहा…

Kash aise jad har kisi ki hoti..