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शनिवार, 30 अक्तूबर 2010

bachhon ki samajh

प्यारे बच्चों,
              मैंने कई दिन तक इंतजार किया लेकिन चैतन्य को छोड़कर किसी ने भी मेरे प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया और चैतन्य कि समझदारी तो देखिये कि उसने मेरे ब्लॉग कि तारीफ कि और चुप्पी साध ली.मैं आप सभी से एक बार और आशा करती हूँ कि आप मेरे प्रश्नों के उत्तर देंगे.
     चलिए आज आपसे और आगे बात करते हैं.ये तो आप भी जानते हैं और मैं भी कि आप बहुत समझदार होते हैं.बड़ों द्वारा आपको छोटा समझकर आपकी यदि हंसी उड़ाई जाती है तो आपको बिलकुल अच्छा नहीं लगता.
मैं आपको अपने बचपन की ऐसी ही एक बात बताती हूँ.तब हमारे यहाँ टी.vi. नहीं था और उस वक़्त इतवार की दूरदर्शन की फिल्म का बहुत क्रेज़ बच्चों में रहता था इसलिए हम पड़ोस में इतवार की फिल्म देखने जाते थे.तो परेशानी यह थी की पड़ोस की कुछ हमसे बड़ी लड़कियां हमें फिल्म देखते हुए देखकर हंसती थी तब ये हमें बहुत बुरा लगता था पर आज हम भी यही करते हैं और पुरानी बातों को सोचकर खूब हँसते हैं पर हाँ क्योंकि हमने खुद ये झेला है इसलिए जल्दी ही चुप हो जाते हैं क्योंकि हमें पता है की बच्चे इस तरह की बातों को गंभीरता से लेते हैं.क्यों बच्चों मैं सही कह रही हूँ न?

2 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बिल्कुल सही....हंसी उड़ना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं.....

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

शालिनी बच्चों को मनोवैज्ञानिक ढंग से समझने के लिए
ऐसे ब्लॉग की बहुत आवश्यकता थी ........ सराहनीय प्रयास है आपका....शुभकामनाये