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मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

पिंकी बिल्ली

    

पिंकी  बिल्ली गई  थी दिल्ली ,लेकर सूटकेस ,

सूटकेस में थे गहने, कंगन, रिंग, नेकलेस ,

ऑटो में  वो ज्यों ही बैठी ,साथ चढ़ा एक चोर ,

सूटकेस लेकर वो भागा , मचा जोर का शोर 

पिंकी भागी उसके पीछे , मारा पीठ पे पंजा ,

चोर गिरा वही सड़क पर, पापी नीच लफंगा ,

पिंकी ने फिर गला दबाकर उसको यूँ धमकाया ,

मैं हूँ मौसी शेर की बेटा ! बोल समझ में आया ,

चोर ने डरकर पकड़ लिए बिल्ली मौसी के पैर ,

ऐसी चपल-चतुर मौसी से रखना न बच्चो बैर !

     शिखा कौशिक 'नूतन '


4 टिप्‍पणियां:

Vaanbhatt ने कहा…

बहुत खूब...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (17-04-2014) को "गिरिडीह लोकसभा में रविकर पीठासीन पदाधिकारी-चर्चा मंच 1584 में अद्यतन लिंक पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Chaitanyaa Sharma ने कहा…

Pyari Kavita

priyanshu kamal ने कहा…

Wah wah....... . ...