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मंगलवार, 20 नवंबर 2012

कितनी मुसीबत की थी घडी !

Squirrel (sachin_kakkar) Tags: india squirrel gillu gilhari sachinkakkar
 कितनी मुसीबत की थी घडी !
छोटी सी गिल्ली के सिर पर पड़ी ,

 पूसी नाम की बिल्ली
गिल्ली के पीछे थी पड़ गयी .


 गिल्ली थी थर थर थर कांप रही ,
फर फर फर भाग रही ,
सामने जब घर आ गया ,
जल्दी से जाकर घर में घुसी ,
कितनी मुसीबत की थी घडी !



 पूसी थी लेकिन जिद पर अड़ी ,
गिल्ली के घर के बाहर खडी ,
गिल्ली ने सोचा अब क्या करूँ ?
जिन्दा रहूँ या डरकर मरूं ?
कितनी मुसीबत की थी घडी !



 डॉगी  चिंटू  वहां आ गया ,
गिल्ली का था वो दोस्त बड़ा ,
भौंका वो पूसी को देख वहां ,
पूसी हो गयी वहां से हवा ,
मुसीबत की टल गयी थी घडी !


 गिल्ली ने खुश हो  ताली बजाई ,
डॉगी को लाकर  टॉफी खिलाई ,
बोली -मेरी जान बचाई !
दोस्ती है तुमने निभाई !
ये ही बात है सबसे बड़ी !
मुसीबत की टल गयी थी घडी !





http://farm2.static.flickr.com/1193/3168173665_52eedb8f83_m.jpg

                                                                                           



                                                                                   शिखा कौशिक 'नूतन '




4 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

.शानदार अभिव्यक्ति बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

surendrshuklabhramar5 ने कहा…

सुन्दर बाल कविता ..और अच्छी प्रस्तुति शालिनी जी .....एक दूजे के काम आते रहें तो आनंद और आये ऐसे ही
भ्रमर 5

surendrshuklabhramar5 ने कहा…

सुन्दर बाल कविता ..और अच्छी प्रस्तुति शिखा जी .....एक दूजे के काम आते रहें तो आनंद और आये ऐसे ही
भ्रमर 5