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गुरुवार, 22 मार्च 2012

नन्ही -नन्ही देवी को वचन दो !







हम  नन्ही -नन्ही  देवी  हैं ;
हमको है सबसे ये कहना ;
कन्या भ्रूण  को मत मारो ;
वे भी हम सबकी हैं बहना .




कन्या उज्जवल करती दो कुल ;
माता,पुत्री, पत्नी,बहना ;
नौ दिन पूजा कर लेने से 
नहीं पाप तुम्हारा  है धुलना .
                                        [सभी फोटोस  गूगल से साभार ]


पूजन नहीं, हमें वचन दो 
ऐसे पाप को रोकोगे ;
स्वयं कभी ऐसा करने की 
मन से भी ना सोचोगे .


                              शिखा कौशिक 

1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता...आपको नवरात्रि और नव संवत्सर की ढेर सारी शुभकामनाएँ!!!