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सोमवार, 5 दिसंबर 2011

माँ ! मुझको फौज़ी बनना है .


stock photo : Little boy in soldier's uniform with a gun. Studio shot




माँ   ! मुझको  फौजी  बनना  है  ;
अपने वतन पे  मर -मिटना  है ,
माँ मुझको फौजी बनना है .


फौज़ी वर्दी लगती है प्यारी ,
इस वर्दी की शान निराली ,
प्रण मेरा इसे धारण करना है 
माँ ! मुझको फौज़ी बनना है .


दुश्मन जब आयेंगें इकट्ठे ,
सबके दांत मैं कर दूंगा खट्टे ,
शेरा बनकर टूट पड़ना है .
माँ ! मुझको फौज़ी बनना है .
                                   जय हिंद !
                                                      शिखा कौशिक 
                                     [मेरा आपका प्यारा ब्लॉग ]

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! अधिक से अधिक पाठक आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर कविता ...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सुन्दर कविता.... जयहिंद...
सादर...

"रुनझुन" ने कहा…

देश प्रेम के सुन्दर भावों से सजी सुन्दर कविता!!!