बच्चे भगवान का स्वरुप होते हैं.उनके संसार में दुःख ,निराशा का कोई स्थान नहीं होता और न ही होना चाहिए.बच्चों के साथ रहकर सभी अपने दुःख भूल जाते हैं.भगवान के इन्ही नन्हे फरिश्तों के लिए ये ब्लॉग........
टिंकू चूहा करे शरारत ; शैतानी की उसको आदत , मम्मी जब भी डांटे उसको ; टिंकू को लगती वे आफत एक दिन लेकर लम्बा डंडा उसने चारो और घुमाया , टकराया दीवार से जाकर धक्का खा वो संभल न पाया .
लगी चोट फिर नाक पर आगे , खून निकल कर बाहर आया , दर्द हुआ फिर बड़ी जोर से , रोकर टिंकू था चिल्लाया .
पापा डॉक्टर बुलाकर लाये , डॉक्टर ने मरहम लगाया , मम्मी क्यों थी डांट पिलाती ? आज उसकी समझ में आया !! शिखा कौशिक 'नूतन '