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सोमवार, 3 जनवरी 2011

मैं नाना के घर जाऊंगा

प्यारी मम्मी फोन मिला दो 
नानी संग बतियाऊंगा ;
या मामा को तुम्ही बुला दो 
मैं नाना के घर जाऊंगा .
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नाना मुझको गोद उठाकर 
कितनी सैर कराते हैं!
नानी संग फिर हमसब मिलकर 
चाट- पकौड़ी खाते हैं ,
तुम चलना चाहोगी तो 
मैं तुम को भी ले जाऊंगा .
प्यारी मम्मी फोन मिला दो 
मैं नाना के घर जाऊंगा .
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मामा अपनी स्कूटी पर 
मुझे घुमाने जाते हैं ,
टाफी-चौकलेट और खिलोने
मनमर्जी दिलवाते हैं,
अपनी टाफी में से कुछ
मैं तुमको भी खिलवाऊंगा .
प्यारी मम्मी फोन मिला दो  
मैं नाना के घर जाऊंगा .
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मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

''बात समझ लो मुन्ना जी ...''

प्यारे-प्यारे दादा जी ,हमे बचाओ दादा जी ,
दादी हमसे रूठ गयी हैं ,उन्हें मनाओ दादा जी .
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प्यारे प्यारे मुन्ना जी ,एक बात बताओ मुन्ना जी ,
क्यों रूठी है दादी तुमसे ,की शैतानी मुन्ना जी ?
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हम तो क्रिकेट खेल रहे थे ,छक्का मारा दादा जी ,
गेंद उछल कर उनके लग गयी ,
हम क्या करते दादा जी ?
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प्यारे प्यारे मुन्ना जी ,माफ़ी मांगों मुन्ना जी ,
कान पकड़कर ;मुर्गा बनकर  ,उन्हें मनाओ मुन्ना जी .
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प्यारी प्यारी दादी जी ,कान पकड़ते दादी जी ,
अब ऐसे न हम खेलेंगे ,करते वादा दादी जी .
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प्यारे प्यारे मुन्ना जी ,माफ़ किया तुम्हे मुन्ना जी ,
चोट किसी के नहीं मरते ,बात समझ लो मुन्ना जी .
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                               शिखा  कौशिक

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

मेरी दादी

मेरी दादी बड़ी निराली ;
रखती हर ताले की ताली ,
उनके आगे पूंछ हिलाते ;
बन्दर ,कुत्ता ,बिल्ली काली ,
मेरी दादी बड़ी निराली !
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एक रोज एक बन्दर आया ;
दादी को उसने धमकाया ,
दादी ने भी दम दिखलाया ;
उठा के लाठी उसे भगाया ,
मैं बोला फिर बजा के ताली ;
मेरी दादी करती रखवाली ,
मेरी दादी बड़ी निराली !
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एक रोज माँ! ने मुझे डांटा   ;
मार दिया था गाल पे चांटा ,
दादी ने माँ! को हडकाया ;
गोद बिठाकर मुझे चुपाया ,
मैं बोला फिर बजा के ताली ;
मेरी दादी है दिलवाली ,
मेरी दादी बड़ी निराली !
[दादी बहुत अच्छी होती है .सभी बच्चों को उनसे न केवल प्यार करना चाहिए बल्कि उनका सम्मान भी करना चाहिए .]
                                                   शिखा कौशिक

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

bachche hain phool

[गूगल से साभार ] 

फूल के जैसे प्यारे होते,फूल के जैसे कोमल.
मिलकर इनसे खिल जाता है मेरे जीवन का हर पल,
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फूल की भांति सुगंध बिखेरें फूल की भांति हँसते,
फूल की भांति प्यार दिखाकर सबसे खुश हो मिलते.
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बच्चों आप के बारे में ही कहूं मैं मन से हंसकर,
आप आयें तो आती हैं खुशियाँ सबके घर-घर.

शनिवार, 27 नवंबर 2010

ek bachche ki kahani

आओ बच्चों तुम्हे मिलाऊँ एक छोटे से बच्चे से,
कहना ना माने अपने बड़ों का ऐसे अक्ल के कच्चे से.
मम्मी-पापा बहुत रईस
देते उसे खूब पॉकेट मनी
अपने साथ के बच्चों में वो
बनता फिरता बहुत धनी
इधर-उधर के खर्चे करता जिन्हें ना करते अच्छे से, 
कहना ना माने अपने बड़ों का ऐसे अक्ल के कच्चे से.
पैसे के कारण उसे मिले कुछ
स्कूल में बच्चे बिगडेल
जिन की संगति में रह-रहकर
कर बैठा वो गंदे खेल
अपनी अक्ल पर चलकर ही तो भटक गया वो रस्ते से,
कहना ना माने अपने बड़ों का ऐसे अक्ल के कच्चे से.
देख के उसकी बुरी आदतें
स्कूल से घर पर शिकायत आई
पढ़ बेटे की गलत हरकतें
मात-पिता के मुख शर्म थी छाई
जाकर उसका कमरा देखा मिली अफीम थी बस्ते से,
कहना ना माने अपने बड़ों का ऐसे अक्ल के कच्चे से.
सुधार ही देंगे बेटा अपना
मम्मी-पापा ने सौगंध ली
बेटे के सामने खुद ही अपने
जीवन की सच्चाई खोली
मिलता है यहाँ सब कुछ बेटे काम करो जब मेहनत से,
कहना ना माने अपने बड़ों का ऐसे अक्ल के कच्चे से.
पैसा तुमको हम ना देंगे
मित्रो से जाकर ले लो
कहना हमारे बेटे नहीं हो
अब तुम मेरे संग खेलो
जाके कहा जब उसने ये सब दिया निकाल उसे दस्ते से,
कहना ना माने अपने बड़ों का ऐसे अक्ल के कच्चे से.
देख के उसकी बुद्धि संभली
उसने मन में ठान ली
मानेगा मम्मी-पापा की
बात ये उसने जान ली
कैसा लगा मिलकर अब बोलो इस छोटे से बच्चे से,
कहना भी माने करना भी जाने ऐसे मन के सच्चे से.

बुधवार, 24 नवंबर 2010

aisi sunao kahani

नानी सुनाओ हमे एक कहानी
जिसमे हो एक राजा-रानी
और प्यारी सी राजकुमारी  !
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नानी सुनाओ हमे एक कहानी
जिसकी हो हर बात निराली
चाचा-चाची हो उसमे या हो मामा-मामी
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नानी सुनाओ हमे एक कहानी
उसमे हो सब बाते प्यारी
बस इतनी सी शर्त हमारी
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                                                       शिखा कौशिक         

शनिवार, 13 नवंबर 2010

bal divas ki shubhkamnayen

प्यारे बच्चो,
                 कल  बाल दिवस है, बाल दिवस यानि हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री और तुम बच्चो के प्यारे चाचा पंडित नेहरू का जन्म दिवस ;इस अवसर पर आपकी दीदी शिखा आपके लिए लाई हैं एक छोटी सी कविता,बताना कैसी लगी------
    "फूलों के जैसे महकते रहो,
   पंछी के जैसे चहकते रहो,
   ये है हमारी शुभ-कामना,
   हँसते रहो ,मुस्कुराते रहो.

निसदिन तुम कुछ सीखो नया,
जलाते रहो ज्ञान  का तुम दिया,
ये है हमारी शुभ-कामना,
हँसते रहो ,मुस्कुराते रहो.
सूरज की भांति चमकते रहो,
तितली के जैसे मचलते रहो,
ये है हमारी शुभ-कामना,
हँसते रहो,मुस्कुराते रहो.

मम्मी डेडी का आदर करो,
सुन्दर भावों से मन को भरो,
ये है हमारी शुभ-कामना,
हँसते रहो,मुस्कुराते रहो.