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रविवार, 23 जून 2013

बिल्लियों के मुखपर ये सुन ,आई है मुस्कान .

A Christmas between dogs and cats Funny Monkeys - Funny Monkey Picture 004 (FunnyPica.com) Kimono Kitty Day Two (2/365) Creative Commons

शैंकी मंकी ने खोली, जंगल में दुकान ,
चारों और खबर है फैली,बनकर के तूफ़ान .
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खाने पीने की नहीं ,नहीं घर का सामान ,
शॉप खुली है बैंगिल की ,रेट हैं एक समान .
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बैंगिल,कंगन,टीका,झूमर सब कुछ यहीं मिलेगा ,
बिल्लियों के मुखपर ये सुन ,आई है मुस्कान .
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साड़ी,लहंगा,सूट पहनकर ,चली हैं वे इठलाकर,
शैंकी बेचे चूड़ी,कंगन ,खूब उन्हें मुस्काकर .
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डिब्बे,डिब्बे खोल-खोलकर थक गया उन्हें दिखाकर ,
पसंद उन्हें न एक भी आई रह गया वो खिसियाकर .
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शैंकी की चोरी से बिल्ली ने एक बॉक्स छिपाया ,
तब शैंकी को सारा माजरा खूब समझ में आया .
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शैंकी बोला बिल्लो रानी दिखता मुझे सभी है ,
तेरे पीछे लटके बैग में बैंगिल भरी पड़ी हैं .
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बरसों पहले बिल्लियों से जीता था मैं हरदम ,
आज निकालोगी क्या मिलकर मेरा तुम सारा दम .
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भूल थी मेरी मूर्ख समझकर शॉप यहाँ लगवाई ,
बंद करूँ अब इसी वक़्त ही इसमें मेरी भलाई .
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                       शालिनी कौशिक

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

बच्चा जब फिर वहीँ आ लिया ."ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - ३०


Pink Rose. Photo by timorousHollyhocks.  Photo by timorousBlue and pink delphinium.  Photo by timorous
Happy Boy Stock Photos - 8451183Naughty Child Stock Photos - 20149913
आँख चुराकर ,मुहं छिपाकर ,
मुझसे थोडा बच-बचकर ,
आस-पास के बच्चे देखें ,
मेरी बगिया को ललचाकर .

कुर्सी पर जो बैठकर देखूं ,
घर से आगे बढ़ जाएँ ,
टहल-टहल जो छिपूं कभी मैं ,
बगिया के द्वारे आ जाएँ .

 मैं भी पक्की हूँ शरारती ,
लुका-छिपी तो खेलूंगी ,
फूल खिले जो हैं बगिया में ,
उनको आज बचा लूंगी .

थोडा सा मैं छिपकर बैठी ,
बच्चा एक था ऊपर आया ,
बगिया के बाहर से उसने ,
फूल के ऊपर हाथ बढाया .

 दौड़ी उस पर तेज़ भागकर ,
बच्चा नहीं पकड़ में आया ,
दूर से जाकर औरों से मिल ,
उसने मुझको खूब चिढाया .

गुस्सा आया उस पर मुझको ,
अपनी हार से शर्मिंदा थी ,
पकडूँगी पर इन्हें कभी तो ,
आस मेरी अब भी जिंदा थी .

 घर के अन्दर जाने का फिर,
 मैंने खूब था स्वांग रचा,
जिस में फंसकर एक शिकारी ,
बच्चा लेने लगा मज़ा .

खूब उछलकर,कूद फांदकर ,
बगिया में था धमक गया ,
तभी मेरे हाथों में फंसकर ,
उसका हाथ था अटक गया .

रोना शुरू हुआ बच्चे का ,
मम्मी-मम्मी लगा चीखने ,
देख के उसका रोना धोना ,
मेरा मन भी लगा पिघलने .

थोडा सा समझाया उसको ,
फूलों से भी मिलवाया ,
नहीं करेगा काम कभी ये ,
ऐसा प्रण भी दिलवाया .

 खुश थी अपनी विजय देखकर ,
फूलों को था बचा लिया ,
माथा पकड़ा अगले दिन तब ,
बच्चा जब फिर वहीँ आ लिया .

    शालिनी कौशिक 

 तुकांत कविता-"मौलिक व अप्रकाशित"