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मंगलवार, 6 सितंबर 2011

तारे


Stars In Color

टिम-टिम टिम-टिम चमक रहे हैं नभ में कितने तारे ;
मम्मी देखो लगते हैं ये तारे कितने......प्यारे !
क्या मैं इनको छू सकता हूँ ?रख सकता हूँ पास ?
क्या ये मेरे जैसे हैं ?........क्या लेते हैं ये साँस ?
क्या ये खाना खाते हैं ?..क्या इनको लगती प्यास ?

[masterfile से sabhar ]
मम्मी माथा चूम के बोली -बात सुनो एक खास 
ये हैं भिन्न खगोलीय पिंड ,घर इनका आकाश ,
इनकी चमक से चमक रही है  देखो कैसे रात ?
ये तो हैं सब के लिए बेटा उस प्रभु की सौगात  ,
छिप  जाये  जब दिन  में ये सब,निकली हो जब धुप ,
आँखों में तुम बसा के रखना इनका सुन्दर रूप .
                                             शिखा कौशिक 

बुधवार, 29 जून 2011

पुष्पों का गुंचा खिलता है.

कुदरत का करिश्मा देखो हर बगिया में खिलता है,
प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

सुबह सुबह जब हम बगिया में टहलने हैं जाते ,
खिले खिले कितने गुलाब हैं हमको हाथ हिलाते,
देख इन्हें हँसते मुस्काते आनंद पूरा मिलता है,
प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.
रात के राजा के फूलों की अज़ब बात है भाई,
रात को श्वेत खिलते हैं सुबह को लालिमा छाई,
इनकी खुशबू से सारा संसार सुगन्धित होता है,
प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

बगन बलिया की बेल पर लक दक पुष्प हैं छाये,
इन्हें तोड़ने सुबह शाम को भक्तगण हैं आये,
खुशबू न होकर भी इनमे प्रभु चरणों में चढ़ता है,
प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.
सर्दी के मौसम में बगिया गैंदे से भर जाये,
नारंगी रंगों से रंग मेरे घर रौनक छाये,
सुबह शाम खिल खिलाना इनका मन में खुशियाँ भरता है,
प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

शालिनी कौशिक